मन की शांति

हम सब आजकल better life और better standard of living की बात करते है l क्या है ये better standard of living. आज के modern science and टेक्नोलॉजी के युग मे अगर हम किसी युवा से पूछते हैआपका लक्ष्य क्या है, तो उसका जवाब होता है ज्यादा पैसा,अमीरीपन होना चाहिये , अच्छी नौकरी जिसमे ज्यादा से ज्यादा पैसा मिलेl व्यक्ति के पास 1लाख है तो 10लाख चहता है 10लाख है तो 1करोड़ चहता है यानी सम्पुर्ण जीवन का लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा पेसा पाना हो गया है l बेहतर जिन्दगी का मतलब बड़ा घर,बड़े rooms,बडी गाडियाँ,बड़े toilets, luxurrious और आरामदायक चीजेl the entire model of better and standard life is to get more and more money l जीवन के चार पुरुषार्थ है धर्म , अर्थ,काम,मोक्ष है लेकिन सारा जीवन अर्थ और काम रह गया है l हमारी सारी modern साइंस and टेक्नोलॉजी matter based है l every object is made of molecules,atoms, electron,proton,newtron जिसके अनुसार सब चीज इस भौतिक जगत मे permanent हैl this modern science and technology has given us many tremendous things no doubt like information technolgy,tunnels,computers,internet,medicine everything which is present in this physical world l लेकिन फिर भी मानव को सुख और आनन्द नही है l हमारे सामने नई नई तरह की समस्याएँ खडी है l मनुष्य मे mental restlessness,anxiiety,depression,diabetes,asthama और ना जाने क्या क्या l जिसका कारन मुझे लगता है की विज्ञान ने हमारे स्थूल शरीर के लिये तो कार्य किया परंतु सुक्षम शरीर और मन के स्तर पर कार्य नही हूआ l हमे भौतिक विश्व से आगे जाकर प्राण,मन,बुद्धि,चित,अहंकार के लैवल तक जानापड़ेगा तब हम मानव की समस्याओं का समाधान कर सकते है l जरुरत है अर्थ और काम से उपर उठकर धर्म,सेवा की और जाना पड़ेगा l वेल्थ से हेल्थ की और जाना पड़ेगा l weath अर्जित करनी है पर दूसरो के लिये l to give and share to others l हमे सेवा भाव मे जाना होगा l जीवन में आनन्द प्राप्ति का मार्ग सफलता नही है हमारा जीवन लोगों के लिये कितना सार्थक है ये महत्वपूर्ण है l स्वामीविवेकानन्द से किसी ने पुछा how make india great l उन्होने कहा it is not by making superpower,not by making defence superpower,not by making tallest buildings,not by greatest industries l india can great only by taking it to its roots l making selfish to selflessness l त्याग,सेवा,to give wealth in service of others,यही better standard of living है l गीता के अनुसार हमे समत्व भाव मे जीना होगा l तभी हमारा औरअपने राष्ट्र ,विश्व का कल्याण सम्भव है l

अनिल गोयल

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