जानें कैसे मिलेगा मां बगलामुखी से आशीर्वाद, क्या है पूजा करने का तरीका

दस महाविद्या में आठवीं स्वरूप देवी बंगलामुखी का है। माता बंगलामुखी पीली आभा से युक्त हैं इसलिए इन्हें पीताम्बरा कहा जाता है। बंगलामुखी की पूजा में पीले रंग का विशेष महत्व है। बगला शब्द संस्कृत भाषा के वल्गा का अपभ्रंश है, जिसका अर्थ होता है दुलहन है अत: मां के अलौकिक सौंदर्य और स्तंभन शक्ति के कारण ही इन्हें यह नाम प्राप्त है। देवी बगलामुखी तंत्र की देवी है। तंत्र साधना में सिद्धि प्राप्त करने के लिए पहले बगलामुखी माता को प्रसन्न करना जरूरी है बगलामुखी देवी रत्नजड़ित सिहासन पर विराजती हैं। रत्नमय रथ पर आरूढ़ हो शत्रुओं का नाश करती हैं। देवी के भक्त को तीनों लोकों में कोई नहीं हरा पाता, वह जीवन के हर क्षेत्र में सफलता पाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वैशाख माह में शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मां बगलामुखी का अवतरण दिवस कहा जाता है। जिस कारण इस तिथि को बगलामुखी जयंती मनाई जाती है। इस वर्ष मां बगलामुखी जयंती 23 अप्रैल 2018 (सोमवार) को थी । इनका प्राकट्य स्थान गुजरात का सौराष्ट्र में माना जाता है। मां बगलामुखी स्तंभन शक्ति की अधिष्ठात्री देवी हैं अर्थात यह अपने भक्तों के भय को दूर करके शत्रुओं और उनके बुरी शक्तियों का नाश करती हैं।

मध्यप्रदेश के आगर जिले में नलखेड़ा कस्बे में मां बगलामुखी का महाभारत कालीन भव्य और प्राचीन मन्दिर स्थित हैं। प्रचलित कथानुसार इस मंदिर की स्थापना धर्मराज युधिष्ठिर ने महाभारत युद्ध के समय की थी। यहां पर माता बगलामुखी की स्वयंभू प्रतिमा शमशान क्षेत्र में स्थित होने से तंत्र में इसका बहुत अधिक हैं।
यहां दूर-दूर से साधक आकर साधना सम्पन्न करते हैं।

मां बगलामुखी को पीला रंग अतिप्रिय है। इसलिए इनके पूजन में पीले रंग की सामग्री का उपयोग सबसे ज्यादा होता है। माता बगलामुखी की पूजा तंत्र विधि की पूजा होती है। इसलिए इनकी पूजा बिना किसी गुरु के निर्देशन में नहीं करनी चाहिए।

शास्त्रों के अनुसार मां बंगलामुखी की पूजा शत्रु के नाश के लिए नहीं करनी चाहिए।

बगलामुखी की पूजा में पीले आसन, पीले वस्त्र, पीले फल और पीले भोग का प्रयोग करना चाहिए।

मां बंगलामुखी के मंत्र जाप के लिए हल्दी की माला का प्रयोग करना चाहिए। बगलामुखी मंत्र के जप के लिए भी हल्दी की माला का प्रयोग होता है। बगलामुखी देवी ही समस्त प्रकार से ऋद्धि और सिद्धि प्रदान करने वाली हैं। मान्यता है कि तीनों लोकों की महान शक्ति जैसे आकर्षण शक्ति वाक् शक्ति और स्तंभन शक्ति का आशीष देने का सामर्थ्य सिर्फ माता के पास ही है देवी के भक्त अपने शत्रुओं को ही नहीं बल्कि तीनों लोकों को वश करने में समर्थ होते हैं विशेषकर झूठे अभियोग प्रकरणों में अपने आप को निर्दोष सिद्ध करने के लिए देवी की आराधना उत्तम मानी जाती हैं।

काली तारा महाविद्या षोडसी भुवनेश्वरी।
बाग्ला छिन्नमस्ता च विद्या धूमावती तथा।।
मातंगी त्रिपुरा चैव विद्या च कमलात्मिका।
एता दश महाविद्या सिद्धिदा प्रकीर्तिता।।

इनकी पूजा के लिए उपयुक्त समय संध्याकाल या मध्यरात्रि मानी गई है।

हिन्दू धर्म के अनुसार एक बार सतयुग में ब्रह्माण्ड को नष्ट करने वाला तूफान उतपन्न हुआ, जिससे समस्त लोको में हाहाकार मच गया और समस्त लोक के लोग संकट में आ गए। इस संकट की समस्या में भगवान विष्णु जी चिंतित हो गए।

जब भगवान विष्णु जी को कोई उपाय ना सुझा तो उन्होंने शिवजी को स्मरण किया। तब भगवान शिवजी ने कहा कि यदि कोई इस विनाश को रोक सकता है तो वो शक्ति रूप है। आप उनकी शरण में जाएँ।

तत्पश्चात, भगवान विष्णु जी ने कठिन तपस्या करके शक्ति रूप देवी को प्रसन्न किया। तदोपरांत माता बगलामुखी देवी प्रकट होकर समस्त लोकों को इस संकट से उबारा। अतः इस दिन से समस्त लोको में माता बगलामुखी का प्रादुर्भाव हुआ।

इस दिन प्रातः काल उठे, नियत कर्मो से निवृत होकर पीले रंग का वस्त्र धारण करें। धार्मिक ग्रंथों के अनुसार व्रती को साधना अकेले मंदिर में अथवा किसी सिद्ध पुरुष के साथ बैठकर माता बगलामुखी की पूजा करनी चाहिए। पूजा की दिशा पूर्व में होना चाहिए। पूर्व दिशा में उस स्थान को जहाँ पर पूजा करना है। उसे सर्वप्रथम गंगाजल से पवित्र कर ले।

तत्पश्चात उस स्थान पर एक चौकी रख उस पर माता बगलामुखी की प्रतिमूर्ति को स्थापित करें। तत्पश्चात आचमन कर हाथ धोए, आसन पवित्र करे। माता बगलामुखी व्रत का संकलप हाथ में पीले चावल, हरिद्रा, एवम पीले फूल तथा दक्षिणा लेकर करें। माता की पूजा धुप, दीप, अगरबत्ती एवम विशेष में पीले फल, पीले फूल, पीले लड्डू का प्रसाद चढ़ा कर करना चाहिए।

व्रत के दिन व्रती को निराहार रहना चाहिए। रात्रि में फलाहार कर सकते हैं। अगले दिन पूजा करने के पश्चात भोजन ग्रहण करें।
मां बगलामुखी की पूजा-अर्चना करने से शत्रु, रोग, कष्ट, कर्ज आदि पर विजय प्राप्त होती है। संसार का कोई ऐसा संताप नहीं है जिसका निवारण इनकी अराधना से संभव न हो। जीवन में अगर कभी ऐसा समय आए जब शत्रुओं के भय से आप बेहाल हो, सभी रास्ते बंद हो और कानूनी मामलों में आप दलदल की तरह फंसकर रह जाएं। इस बुरे दौर में पूरे ब्रह्मांड की सबसे बड़ी शक्ति मां देवी बगलामुखी की पूजा से आप अपने जीवन को सफल बनाकर मनचाही दिशा दे सकते हैं। संपूर्ण ब्रह्माण्ड की शक्ति इनमें समाई हुई है। मां की जयंती के दिन अथवा प्रत्येक बृहस्पति इनकी आराधना करने से शत्रुनाश, वाकसिद्धि, वाद-विवाद में विजय, शत्रुओं और बुरी शक्तियों का नाश तथा जीवन में समस्त प्रकार की बाधाओं से मुक्ती मिलती है।

मंत्र ऊँ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां
वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्ववां कीलय
बुद्धि विनाशय ह्रीं ओम् स्वाहा।

” ऊँ ह्रीं बगलामुखी सर्वदुष्टानां
वाचं मुखं पदं स्तंभय जिह्ववां कीलय
बुद्धि विनाशय ह्रीं ओम् स्वाहा।”

यदि आपको लगता है कि आप किसी बुरु शक्ति से पीड़ित हैं, नजर जादू टोना या तंत्र मंत्र आपके जीवन में जहर घोल रहा है, आप उन्नति ही नहीं कर पा रहे अथवा भूत प्रेत की बाधा सता रही हो तो देवी के तंत्र बाधा नाशक मंत्र का जाप करना चाहिए।

ॐ ह्लीं श्रीं ह्लीं पीताम्बरे तंत्र बाधाम नाशय नाशय

आटे के तीन दिये बनाये व देसी घी ड़ाल कर जलाएं।

कपूर से देवी की आरती करें।

रुद्राक्ष की माला से 7 माला का मंत्र जप करें।

मंत्र जाप के समय दक्षिण की और मुख रखें।

यदि आपकी कुंडली कहती है कि अकाल मृत्यु का योग है, या आप सदा बीमार ही रहते हों, अपनी आयु को ले कर परेशान हों तो देवी के ब्रह्म विद्या मंत्र का जाप करना चाहिए.

ॐ ह्लीं ह्लीं ह्लीं ब्रह्मविद्या स्वरूपिणी स्वाहा:

पीले कपडे व भोजन सामग्री आता दाल चावल आदि का दान करें।

मजदूरों, साधुओं,पंडितो  व गरीबों को भोजन खिलायें।

प्रसाद पूरे परिवार में बाँटे।

रुद्राक्ष की माला से 5 माला का मंत्र जप करें।

मंत्र जाप के समय पूर्व की ओर मुख रखें।

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