क्या जन्म कुंडली और हस्त रेखा विज्ञानं के परिणाम अलग होते है ?

दोस्तों लोग कहते है जन्म कुंडली और हस्त रेखा विज्ञानं में अंतर् होता जबकि ऐसा नहीं है एक जातक की जन्म कुंडली और हाथ का अगर अध्यन करेंगे तो दोनो के परिणाम सामान ही आएंगे !और आना भी चाहिए ,ऐसा थोड़ी होता है की कुंडली के हिसाब से परिणाम दूसरा होगा और हाथ में कुछ और !अगर अंतर् आरहा है तो ये हमारे अध्यन की कमी है ना की उस शास्त्र की कमी है ! विधाता ने तो हमारे हाथ में भी जन्म कुंडली का निर्माण किया है ,जिस प्रकार जन्म कुंडली में १२ भाव होते है और प्रतेक भाव अलग अलग चीजों के अध्यन के लिए निर्धारित है ऐसे ही हाथ में भी कुंली के १२ भावो का अध्यन उसी रूप में किया गया है !सायद जन्म कुंडली का अविष्कार हाथो की कुंडली के आधार पर ही हुआ है।जैसे मैन फोटू डाली है उसको समझो पहला भाव अंगूठे को दरसाया गया है जिसका मतलब है देह । दूसरा भाव अंगूठे के मूल में यव माला होती है जो धन की इस्थिति को बताती है।तीसरा भाव भाई बहनों का होता है।जो हाथ मे सुक्र पर्वत के ऊपरी भाग को देख कर ज्ञात किया जाता है। चतुर्थ भाव माता का होता है। जो हाथ मे चंद्र पर्वत से पता चलता है। पंचम भाव संतान का होता है जो हाथ मे जिसके लिये हैम चन्द्र पर्वत के निचले हिस्से से भी पता लगाते साथ मे यहाँ से विद्या भी देखी जाती है क्यूंकि कुंडली मे पंचम भाव विद्या का भी होता है।छठा भाव सत्रु का होता है जिसके लिये हाथ मे मंगल पर्वत का अध्यन करना चाहिए। सप्तम भाव पत्नी का होता है जिसका अध्यन विवाह रेखा से होता है। अष्टम भाव मत्यु का होता है जिसके लिये बुध पर्वत के नीचे सवास्थ्य रेखा का अध्यन करे। नवम भाव भाग्य का धोतक होता है हाथ मे भाग्य रेखा शनि पर्वत पर आकर खत्म होती है और धन के लिये शनि पर्वत का अध्यन अति आवयस्यक है।दसम भाव कुंडली मे व्यापार या राज सत्ता का होता है कुंडली मे इसके लिये गुरु पर्वत गुरु रेखा का अध्यन जरूरी है। एकादस भाव कुंडली मे लाभ व वाहन का होता है,गुरु पर्वत पर पड़ी रेखा को वाहन रेखा और मत्स्य को लाभ का प्रतीक मानते है। द्वादष भाव कुंडली मे खर्चे का होता है हाथ मे ऐसे बीच मे देखे । बीच का छेत्र राहु छेत्र होता है जिसका अध्ययन करके हम जातक के खर्चो का अनुमान लगा सकते है।
 धन्यवाद दोस्तो मैं रतन बबेरवाल पामिस्ट आपके लिये नई खोज लाता रहूंगा आशा है आपको ये पसन्द आएगी। 8107958677

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